कुछ ख्वाबों का दिल तोड़ देते हैं
कुछ अरमानों से मुँह मोड़ लेते हैं
सच और झूठ से अब और कितना लड़े
कुछ वक्त की अंगड़ाइयों पे छोड़ देते हैं
कुछ ख्वाहिशों के बोझ ने कितना सताया
कुछ सपनों ने भी कितनी रात जगाया
वक्त से ही क्यूँ करे सब शिकवे-गीले
इन भारी-भरकम बेड़ियों को तोड़ देते हैं
इस दुनिया को हम छोड़ सकते नहीं
आसमान पे इक दुनिया जोड़ सकते हैं
तो क्यूँ उल्झे जहन में उपजे सवालों से
अपनी इन नादानियों को झकझोर देते है
ये भरम है की ये हो सकता था
ये भी नहीं की कोई साथ रो सकता था
जो न हुआ वो कभी होगा भी नहीं
इस इक बात को जीवन में ओढ़ लेते हैं
हम जानते हैं बहुत मुश्किल है कुछ छोड़ देना
हम मानते हैं बहुत मुश्किल है कुछ तोड़ देना
पर किसी पे नहीं हमारा खुद पे ही इख़्तियार है
इसी सच को दिल से मज़बूती से जोड़ लेते हैं
कुछ अरमानों से मुँह मोड़ लेते हैं
सच और झूठ से अब और कितना लड़े
कुछ वक्त की अंगड़ाइयों पे छोड़ देते हैं
कुछ ख्वाहिशों के बोझ ने कितना सताया
कुछ सपनों ने भी कितनी रात जगाया
वक्त से ही क्यूँ करे सब शिकवे-गीले
इन भारी-भरकम बेड़ियों को तोड़ देते हैं
इस दुनिया को हम छोड़ सकते नहीं
आसमान पे इक दुनिया जोड़ सकते हैं
तो क्यूँ उल्झे जहन में उपजे सवालों से
अपनी इन नादानियों को झकझोर देते है
ये भरम है की ये हो सकता था
ये भी नहीं की कोई साथ रो सकता था
जो न हुआ वो कभी होगा भी नहीं
इस इक बात को जीवन में ओढ़ लेते हैं
हम जानते हैं बहुत मुश्किल है कुछ छोड़ देना
हम मानते हैं बहुत मुश्किल है कुछ तोड़ देना
पर किसी पे नहीं हमारा खुद पे ही इख़्तियार है
इसी सच को दिल से मज़बूती से जोड़ लेते हैं
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