Saturday, 25 January 2020

सच की उम्मीदों के साये में हम चल रहे हैं

सच की उम्मीदों के साये  में हम चल रहे हैं
पर अजीब है न हम झूठ को देख मचल रहे हैं

ये सच है सच हर बार किसी को तोड़ ही जाता है
हाँ ये सच है कुछ झूठी मुस्कानों से ही पल रहे हैं

माना झूठ एक दिन हमे बहुत रुलाएगा, छोड़ जायेगा
तो क्या सच की बदौलत हर रोज़ हम बे-मौत मर रहे हैं

हर सच जानते हैं हम, हमें अपनी कसम
फिर क्यों झूठी उम्मीदों के सहारे बढ़ रहे हैं 

झूठ आज भी दिल को क्यूँ सुकून पहुंचता है 
सच आज भी क्यूँ हमें नाउम्मीदी में जकड़ रहे हैं

सच ये भी की सच और झूठ में फर्क है अब कहाँ
सच ये भी की हालात सच-झूठ के मायने बदल रहे हैं

छोड़ दो हमें झूठे हौसलों की बातें बताना
हम छोड़ते हैं सच्ची कहानियाँ जो गढ़ रहे हैं 

    

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