'क्यूँ' का जवाब जानती हूँ आएगा नहीं
वक्त भी 'क्यूँ' को शायद आज़मायेगा नहीं
वो 'क्यूँ' जो मेरे दिलों दिमाग में हरदम भरा है
वो 'क्यूँ' जो मेरी ज़िन्दगी के हर मोड़ पे खड़ा है
इस 'क्यूँ' ने हर रात मुझसे कितना कुछ कहा है
इस 'क्यूँ' के लिए मैंने कितना कुछ सहा है
बेज़ुबान ये 'क्यूँ', क्यूँ इतना शोर मचाता है
बेबस सा ये 'क्यूँ', क्यूँ मुझे इतना रुलाता है
हर दिन मेरा हौसला तोड़ता ये 'क्यूँ'
हर वक्त बड़बड़ाता बोलता ये 'क्यूँ'
ये 'क्यूँ' मेरे मौत से रिश्ता निभाएगा
ज़िन्दगी जानती है जवाब नहीं आएगा
वक्त भी 'क्यूँ' को शायद आज़मायेगा नहीं
वो 'क्यूँ' जो मेरे दिलों दिमाग में हरदम भरा है
वो 'क्यूँ' जो मेरी ज़िन्दगी के हर मोड़ पे खड़ा है
इस 'क्यूँ' ने हर रात मुझसे कितना कुछ कहा है
इस 'क्यूँ' के लिए मैंने कितना कुछ सहा है
बेज़ुबान ये 'क्यूँ', क्यूँ इतना शोर मचाता है
बेबस सा ये 'क्यूँ', क्यूँ मुझे इतना रुलाता है
हर दिन मेरा हौसला तोड़ता ये 'क्यूँ'
हर वक्त बड़बड़ाता बोलता ये 'क्यूँ'
ये 'क्यूँ' मेरे मौत से रिश्ता निभाएगा
ज़िन्दगी जानती है जवाब नहीं आएगा
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